न जाने इस recession में क्या क्या हो
सत्यम गिरी और slumdog millionaire बन
Terrorist के बम न जाने कितनो को निगल गए
पर हम रिपोर्ट पे रिपोर्ट बनाते चले गए
फाइनेंस कभी होम तो प्राइम कभी फाइनेंस मिनिस्टर बन
इस बुरे टाइम में तो नेता भी लटक
बिज़नस के नाम पे बी-स्कूल भी फस गए
Placement तो दूर placed men भी हिल गए
सेंसेक्स के झटके suicide pills बन गए
21000 से 9000 पे तो कितनो के कपडे उतर गए
रोटी दल की कीमतें दुगनी हो गयी
गरीबो की भूख भी अब daily से weekly हो गयी
आग लगाने वाले नहीं बचे, बुझाने वाले भी झुलस गए
हम दो कदम आगे बढे और कोसो लुड़क गए.