
ए मोहब्बत तू मुझेसे इतनी खफा क्यों है
तेरे बिना ना में ना मेरी ज़िन्दगी है
तू है तो इन् आँखों को भी सुकून है
तेरे बिना तो इनमे भी बस तलाश है
तू है तो इन् होंटों पे प्यार की मुश्कान है
तेरे बिना तो यह लब्जों से भी अनजान है
तू है तो मुझे वक़्त की ज़रूरत नहीं
तेरे बिना तो उससे भी मेरी ज़रूरत नहीं
तू है तो अँधेरे रास्ते भी अच्छे लगते है
तेरे बिना तो हर सपने भी खोखले लगते है
तू है तो मेरी ज़िन्दगी में हर ख़ुशी है
तेरे बिना तो इस दिल की धडकनों में कमी है
ए मोहब्बत तू मुझेसे इतनी खफा क्यों है
तेरे बिना ना में ना मेरी ज़िन्दगी है