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December 7, 2008

Yeh Duniya


यह दुनिया कितनी अजीब है, चाहना और मिलना केवल नसीब है,
मेहनत से रोटी नही मिलती, झूठ बिना दाल नही गलती,
आईने से शर्माना पड़ता है, छुप छुपकर रोना पड़ता है,
आंसुओ की कीमत नही होती, वरना यह गरीबी नही होती.

सोने की चमच से भरा पेट खाता है, और भूखा नंगा आधे पेट सो जाता है,
सच को हमेशा साबित करना पड़ता है, कभी तो अपनों से भी लड़ना पड़ता है,
पैसो से इंसान जाने जाते है, बिन उसके तो भगवान भी नही पूजे जाते ,
हर अरमान को दबाना पड़ता है, हर दर्द छुपाना पड़ता है.

क्या करूँ, कैसे लडूं कुछ समझ नही आता है,
क्यूँ जन्मा , क्यूँ मरूँगा, इसका भी अर्थ नही आता है,
चला में तो बिन मंजिल की राह पर, क्या पाऊ, क्या खोऊ अभी नही मेरे ऊपर,
जीऊंगा जब तक साँस है, चलूँगा जब तक एहसास है,
किसी मोड़ पे फिर तक्राऊंगा , भूलना नही में वापस आऊंगा .

1 comment:

  1. theme is good...
    properly ended too....giving a positive picture....a hope...
    and grammaticall full hindi :)
    so mkes it even great....

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