हर नज़रे अगर टकरा जाये तो एहसासों का क्या होगा
हर मुश्कान अगर बिखर जाये तो इस दिल का क्या होगा
पत्थरों से अगर घर टूट जाये तो रिश्तों का क्या होगा
आंसू अगर पानी कहलाये तो प्यासों का क्या होगा
फटी चादर अगर नींद दिलाये तो छतों का क्या होगा
सांप अगर सत्संग करे तो वाणी का क्या होगा
इंसान टूटकर गिर जाये तो कहानियों का क्या होगा
अनिश्चिता निश्चित हो जाये तोह जीने का अर्थ क्या होगा

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