थोडा थोडा कर करके समय बदल जाता है
थोडा थोडा चल कर हमसफ़र बदल जाता है...
जो सोचा था वोह उस मोड़ का किस्सा बन जाता है
जो हो रहा है वोह इस मोड़ का हिस्सा हो जाता है....
पलट कर देखने पर कुछ नज़र नहीं आता है
रुक कर समेटने पर कुछ हाँथ नहीं आता है....
आँखों की बातें सबको समझ में आता है
लेकिन वोह मेरे लबों के शब्दों को भी समझ नहीं पाता है.....
अब थामना नहीं रुकना नहीं किसीके इंतज़ार में
इस जिंदगी को बर्बाद नहीं होने दूंगा एक मज़ार में.....
जो छूट गया वोह एक ना एक दिन फिर टकराएगा
आने वाला लौट कर हमसफ़र फिर बन जायेगा....

Wow...!!! what an emotion...
ReplyDeleteLike Like!! :)
ReplyDelete