Popular Posts

December 9, 2008

Mein Zindagi


इस भीड़ भरी दुनिया में अपने को खोया पता हूँ
हर ज़ंग हर लड़ाई में अपने को सोया पता हूँ

कुछ समझ नही आता की में ख़ुद से क्या चाहता हूँ
जो मिलता है उसमे भी कुश नही रह पता हूँ

मासूम सा चेहरा देख मुश्कुरा सा जाता हूँ
पर इस मतलबी दुनिया में अपनों को ही समझ नही पता हूँ

ख़ुशियो का मोल लगते लोगों में अपने आप को ठगा पता हूँ
आंसुओ की धारा में बस बेह्ता चल जाता हूँ

दर्द तो मेरी परछाई है इससे ही पीछा छुड़ाता हूँ
पर बिने इसके ख़ुद को अधुरा पता हूँ

में ज़िन्दगी
इस भीड़ भरी दुनिया में अपने को खोया पता हूँ
में ज़िन्दगी
हर ज़ंग हर लड़ाई में अपने को सोया पता हूँ

December 7, 2008

Yeh Duniya


यह दुनिया कितनी अजीब है, चाहना और मिलना केवल नसीब है,
मेहनत से रोटी नही मिलती, झूठ बिना दाल नही गलती,
आईने से शर्माना पड़ता है, छुप छुपकर रोना पड़ता है,
आंसुओ की कीमत नही होती, वरना यह गरीबी नही होती.

सोने की चमच से भरा पेट खाता है, और भूखा नंगा आधे पेट सो जाता है,
सच को हमेशा साबित करना पड़ता है, कभी तो अपनों से भी लड़ना पड़ता है,
पैसो से इंसान जाने जाते है, बिन उसके तो भगवान भी नही पूजे जाते ,
हर अरमान को दबाना पड़ता है, हर दर्द छुपाना पड़ता है.

क्या करूँ, कैसे लडूं कुछ समझ नही आता है,
क्यूँ जन्मा , क्यूँ मरूँगा, इसका भी अर्थ नही आता है,
चला में तो बिन मंजिल की राह पर, क्या पाऊ, क्या खोऊ अभी नही मेरे ऊपर,
जीऊंगा जब तक साँस है, चलूँगा जब तक एहसास है,
किसी मोड़ पे फिर तक्राऊंगा , भूलना नही में वापस आऊंगा .

October 8, 2008

Mein Motu


कोई गोलु तो कोई लडू तो कोई मोटू कहता है

जाने यह शरीर कितना मान सहता है


अगर हम होते तो पतलो की पहचान नही होती

अगर हम होते तो restaurant में unlimited थाल नही होती


अगर हम होते तो laughing Buddha कहाँ से आता

अगर हम होते तो 36-48 की कमर कौन सिलवाता


कोई ढोलक तो कोई टमाटर तो कोई गोलुगोटू कहता है

जाने यह शरीर कितना मान सहता है


अगर हम होते तो बातों में भार नही होता

अगर हम होते तो तकिये की जगह कोई गद्देदार नही होता


अगर हम होते तो कितनी slim classes नही होती

अगर हम होते तो jogging की कभी शुरुआत नही होती


कोई पेटू तो कोई आलू तो कोई chubby कहता है

जाने यह शरीर कितना मान सहता है


अगर भगवान् के कारखाने में ऐसी assembly लाइन नही होती

तो यह धरती इतना सारा वजन नही धोती


अगर हम होते तो 24 घंटे कौन मुस्कुराता

अगर हम होते तो तुम्हे कौन हसाता कौन रुलाता……

May 16, 2008

Maa


आंचल में जिसके है सारा संसार

बांहों में जिसके है ढेर सारा प्यार.


हमे वो हंसती है हमे समझती है

हम सब को जीने का मकसद बताती है


राह वो दिखाती है, मंजिल वो बताती है

ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाती है.


आँखों में जिसके है ढेर सारी ममता

हांथो के बिना जिसके मुझे खाना नही जमता


जननी वो मेरी मुझे है उससे प्यार

जिसके बिना जीवन जीना है बेकार.

March 8, 2008

Kyun


क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है

शाबित कुछ करना है शाबित कुछ करते है
इसी चक्कर में बार बार गिरकर शम्भलते है

क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है

आशाए मरती हैं तमन्नाये दफनाई जाती है
मरने से पहले ही लाशों की तरह चलते है

क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है

प्यार कई रंगो में आता है कई सपने सजाता है
क्यों हम नही समझते क्यों इसे भी परखते है

क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है

January 23, 2008

Parvaah


क्या सही क्या गलत कौन परवाह करता है
इंसान अपने लिए जीता है अपने लिए मरता है

यह ऐसा क्यों है वैसा क्यों नही कौन परवाह करता है
थोडा सा डिफरेंस तो भगवान् भी मनुफक्टुरिंग में करता है

मैं अच्छा हूँ या नही कौन परवाह करता है
इस दुनिया में किसी का ऋण कोई और भरता है

क्या सही क्या गलत कौन परवाह करता है
इंसान अपने लिए जीता है अपने लिए मरता है

यहाँ अच्छे कामो को करने से हर कोई डरता है
और बुरे कामो को करने मैं दूसरो से लड़ता है

कैसे जियु कैसे मरू कौन परवाह करता है
मिटटी से आया हूँ मिटटी मैं मिल जाऊंगा क्या फर्क पड़ता है

क्या सही क्या गलत कौन परवाह करता है
इंसान अपने लिए जीता है अपने लिए मरता है