
क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है
शाबित कुछ करना है शाबित कुछ करते है
इसी चक्कर में बार बार गिरकर शम्भलते है
क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है
आशाए मरती हैं तमन्नाये दफनाई जाती है
मरने से पहले ही लाशों की तरह चलते है
क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है
प्यार कई रंगो में आता है कई सपने सजाता है
क्यों हम नही समझते क्यों इसे भी परखते है
क्यों हम जीतें है क्यों हम लड़ते है
क्यों इस चक्कर में थक थककर मरते है
Hii Ankit.,
ReplyDeletewell awesome poetry..
really mesmerising and heart touching..
lage raho!!!!!
heyyyyy
ReplyDeletemast poerty hai
nirma mai ye sab kab se padhne lage
tu pahile to aisa nahi tha
nice work... :)
ReplyDeleteby the way, meri bhi ek poem ka title kyon hai.... tumhare jitni acchi na sahi par ek prayaas hai...
ReplyDeletetime mile to dekhna